अध्याय 60 एक उदार उपहार

बुज़ुर्ग सज्जन ने देखा कि ऐस्ट्रिड रुक गई है, तो चमकते उत्साह के साथ पूछ बैठे, “बिटिया, क्यों न कहीं बैठकर आराम से बातें करें?”

ऐस्ट्रिड ने भौंह उठाई।

वह कई घंटों से बाज़ार में घूम रही थी और सच कहें तो थक भी गई थी। इस रहस्यमय बूढ़े के पास कहने को जो भी था, उसे सुनते-सुनते कहीं बैठ जाना एक अच्छी-खा...

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